तय सीमा से ज्यादा भेजी गई छात्रवृत्ति, होगी समायोजित
सामान्य श्रेणी के विद्यार्थियों के बैंक खातों में निर्धारित सीमा से अधिक छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि भेज दी गई है। यह गड़बड़ी विभागीय स्तर पर हुई मानवीय चूक के कारण सामने आई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, अतिरिक्त भेजी गई राशि को छात्रों की भविष्य में मिलने वाली छात्रवृत्ति से समायोजित किया जाएगा। यह जानकारी समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने दी है।
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3.04 लाख छात्रों को मिली छात्रवृत्ति
समाज कल्याण विभाग की ओर से 25 जनवरी को छात्रवृत्ति वितरण किया गया था, जिसमें लगभग 3.04 लाख सामान्य श्रेणी के छात्र शामिल थे। नियमानुसार सामान्य श्रेणी के छात्रों को केवल निर्धारित अधिकतम सीमा तक ही शुल्क प्रतिपूर्ति दी जाती है, लेकिन तकनीकी खामी के कारण कई छात्रों को पूरी फीस की राशि उनके खाते में भेज दी गई।
सूत्रों के अनुसार, इस गलती से प्रभावित छात्रों की संख्या दो हजार से अधिक है, जिनमें से अधिकांश छात्र बीएड पाठ्यक्रम से संबंधित हैं।
नियमानुसार कितनी मिलनी चाहिए छात्रवृत्ति?
सरकारी नियमों के अनुसार सामान्य श्रेणी के छात्रों को पाठ्यक्रम के आधार पर चार श्रेणियों में शुल्क प्रतिपूर्ति दी जाती है—
- कक्षा 11वीं, 12वीं और आईटीआई पाठ्यक्रमों के लिए अधिकतम 10,000 रुपये
- डीएलएड, बीए और बीएससी पाठ्यक्रमों के लिए अधिकतम 20,000 रुपये
- एमए और बीएड पाठ्यक्रमों के लिए अधिकतम 30,000 रुपये
- बीटेक और एमबीबीएस पाठ्यक्रमों के लिए अधिकतम 50,000 रुपये
लेकिन इस बार सॉफ्टवेयर में इन निर्धारित सीमाओं (कैपिंग) को लागू नहीं किया गया, जिससे कई छात्रों को तय सीमा से अधिक धनराशि स्थानांतरित हो गई।
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विभाग मंथन में जुटा, होगी रिकवरी नहीं बल्कि समायोजन
विभाग अब इस बात पर मंथन कर रहा है कि अतिरिक्त भेजी गई धनराशि को किस प्रकार समायोजित किया जाए। फिलहाल यह निर्णय लिया गया है कि यह रकम छात्रों की आगामी छात्रवृत्ति या शुल्क प्रतिपूर्ति से समायोजित की जाएगी। साथ ही, इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।